कहते हैं इंसान बड़ा अपनी कद-काठी से नहीं, बल्कि अपने हौसलों से होता है। क्रिकेट में भी ऐसे कई वाकये हुए जहां खिलाड़ियों ने कभी न हारने के जज्बे का परिचय दिया। उन्हीं में से एक प्लेयर रहे भारत के लेग स्पिनर अनिल कुंबले (Anil Kumble)। इस खिलाड़ी ने अपने देश के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल दी थी। वेस्टइंडीज के खिलाफ हुए एक टेस्ट मैच के दौरान कुंबले पूरी तरह से लहूलुहान हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने अस्पताल जाकर अपना इलाज करने के बजाय खेलना जारी रखा। इस पूरी घटना की दास्तां हम आपको बताने जा रहे हैं।

मुश्किल स्थिति में बैटिंग करने उतरे थे Anil Kumble

दरअसल यह वाकया साल 2002 का है। टीम इंडिया वेस्टइंडीज दौरे पर गई हुई थी। दोनों टीमों के बीच पांच टेस्ट व पांच एकदिवसीय मैचों की सीरीज खेली जानी थी। टेस्ट श्रृंखला चल रही थी। सीरीज 1-1 की बराबरी पर था। एंटीगुआ के मैदान पर चौथे टेस्ट में दोनों ही टीमें आमने-सामने थी। विंडीज टीम ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले खेलने आई टीम इंडिया 237 रनों के स्कोर पर अपने 5 विकेट गंवाकर संघर्ष करने आई थी। राहुल द्रविड़ के आउट होने के बाद अनिल कुंबले क्रीज (Anil Kumble) पर उतरे थे।

मर्व डिल्लन की कातिलाना गेंद ने तोड़ा जबड़ा

वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम इंडिया लड़खड़ाती हुई नजर आ रही थी। विरोधी गेंदबाज मेहमान टीम के ऊपर हावी होने लगे थे। एक छोड़ पर अजय रात्रा डटे हुए एक बेहतरीन पारी खेल रहे थे। उन्हें जरूरत थी, तो दूसरे छोड़ पर टिकने वाले किसी साथी की। अनिल कुंबले (Anil Kumble) ने उनका बखूबी साथ निभाया। भले ही वह महज 6 रन ही बना पाए, उन्होंने एक उपयोगी साझेदारी में बहुमूल्य योगदान दिया। उसी वक्त विंडीज टीम के घातक गेंदबाज मर्व डिल्लन की एक गेंद उनके हेलमेट को छेदकर बिजली की गति से उनके जबड़े से टकरा गई।

मैदान पर ही बह उठी खून की धारा

क्रिकेट जगत की प्रेरणादायक किस्सों में से एक के महानायक अनिल कुंबले (Anil Kumble) बने। मर्व डिल्लन की खतरनाक गेंद ने उनका जबड़ा तोड़ दिया। उन्होंने हेलमेट निकाला तो उनके मुंह से खून की धारा बह उठी। हालांकि इस पूरी घटना के दौरान उनके चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं आई। इसके बाद उन्होंने अपने चेहरे पर पट्टी बंधवाई और खेलना जारी रखा। अगले 20 मिनट तक वह क्रीज पर जमे रहे जब तक कि वेस्टइंडीज खेमे ने उन्हें आउट नहीं किया। जब तक ऐसा हुआ, तब तक वह अपना काम कर चुके थे। अजय रात्रा के साथ कुंबले ने एक बहुमूल्य साझेदारी निभाकर भारतीय टीम को एक बेहतर स्थिति में पहुंचा दिया था।

स्टेडियम में मौजूद दर्शक रहे गए हक्के-बक्के

भारत की जब बैटिंग खत्म हुई, तब ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि वह एक गेंदबाज के बिना मैदान पर उतरेगी। अनिल कुंबले (Anil Kumble) जिनका जबड़ा टूट चुका था, वह शायद अब तक अपने देश रवाना होने के लिए एयरपोर्ट पहुंच चुके होंगे। टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने फील्डिंग करने के लिए जैसे ही मैदान के अंदर कदम रखा, तो उनमें वो खिलाड़ी भी मौजूद था जिसकी हालत बद से बदतर थी। कुंबले सिर से लेकर पूरे चेहरे पर पट्टी बांधे खेलने उतर गए। यह नजारा देख पूरा स्टेडियम स्तब्ध रह गया। दुनिया के इस महानतम स्पिनर ने उस पारी में लगातार 14 ओवर फेंके थे। इतना ही नहीं, उन्होंने महान ब्रायन लारा का महत्वपूर्ण विकेट लिया था जिन्हें आउट करना किसी भी गेंदबाज के लिए एक सपने से कम नहीं था।

सर विवियन रिचर्ड्स ने कही थी ऐतिहासिक बात

मुकाबला खत्म होने के बाद जब अनिल कुंबले (Anil Kumble) से उनके इस साहसिक कार्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने जवाब से सबका दिल जीत लिया। उन्होंने कहा, “मैं ड्रेसिंग रूम में बैठकर तमाशा देखना नहीं चाहता था। कम से कम अब मैं इस खयाल के साथ घर जा सकता हूं कि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया”। दुनिया के महानतम बल्लेबाज और वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर सर विवियन रिचर्ड्स ने इसपर अपना स्टेटमेंट दिया, “मैंने खेल के मैदान पर इससे साहसिक चीज नहीं देखी”।

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