भारतीय क्रिकेट में अतुलनीय योगदान देने में वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) का भी नाम शामिल है। उन्होंने 1999 में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में पर्दापण करने से लेकर 2013 में रिटायर होने तक टीम इंडिया के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करके दिखाया। सहवाग ने 374 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि यह सफर उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। करियर के शुरुआती दौर में वीरू को स्टेट लेवेल की टीम में जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। मगर एक मैच ने उनकी किस्मत रातों रात बदल दी थी।

एक मैच ने बदल दी थी सहवाग की जिंदगी

वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) के लिए करियर का शुरुआती दौर काफी पीड़ादायक था। दरअसल नजफगढ़ के इस बल्लेबाज को इनके करियर के शुरुआती दौर में कोई मौका नहीं दे रहा था। ढेरों रन बनाने के बाद भी वीरू को स्टेट लेवेल की टीम में नहीं चुना जाता था। उस दौरान वीरू के कोच ने किसी तरह उनके लिए एक मैच का इंटर-स्टेट मुकाबले का आयोजन करवाया। उनके कोच ने उन्हें कहा था कि यह उनका आखिरी मौका होगा। सहवाग ने भी इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और करीब 150 रनों का स्कोर बनाया। इसके बाद सेलेक्टर्स ने आखिरकार उन्हें दिल्ली की टीम में चुना

ऐसे बने थे टीम इंडिया के ओपनर

दुनिया के खतरनाक सलामी बल्लेबाजों की अगर बात होगी तो वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) का जिक्र जरूर होगा। इसके अलावा उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 2 तिहरा शतक व वनडे में एक दोहरा शतक दर्ज है। सहवाग में हालांकि अपने करियर की शुरुआत मध्यक्रम बल्लेबाज के तौर पर की थी। बाद में चलकर सौरव गांगुली ने उनकी प्रतिभा को देखकर उन्हें ओपनिंग करने के लिए कहा। इसके चलते दादा को एक पायदान नीचे बैटिंग करने आना पड़ा।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *